“टेली लॉ” गरीब तक न्याय और सशक्तिकरण का माध्यम : पारूल पंवार

महिला थाने में आज राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली व उ०प्र० राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के निर्देश पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अलीगढ़ के तत्वावधान में आयोजित “टेली लॉ” पर विधिक साक्षरता, जागरूकता एवं सहायता शिविर का आयोजन किया गया।

इस दौरान जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अलीगढ़ की सचिव पारुल पंवार ने कहा कि टेली लॉ गरीब तक न्याय पहुँचाने एवं सशक्तिकरण का माध्यम है | उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायत स्तर पर राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर के वरिष्ठ एवं अनुभवी अधिवक्ताओं से सहायता प्राप्त की जा सकती है| प्राधिकरण की सचिव ने कहा कि इस टेली लॉ के माध्यम से न्याय आपके द्वार परिकल्पना को भी साकार किया जा रहा है|

कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के जिला प्रबंधक विष्णु कांत ने बताया कि अभी तक जिले में गभाना एवं अमरौली (जवां) के दो सी०एस०सी० पर टेली लॉ की सुविधा थी किन्तु अब जल्द ही जिले के सभी कॉमन सर्विस सेंटर पर टेली लॉ सुविधा उपलब्ध होगी |

टेली लॉ- प्राधिकरण प्रवक्ता उपेन्द्र मिश्रा ने बताया कि दूर दराज एवं हाशिये पर रहने वाले व्यक्तियों हेतु टेली लॉ प्रोजेक्ट भारत सरकार द्वारा संचालित है| शुरुआत में एक मॉडल के रूप में इसकी शुरुआत की गयी थी| जनपद अलीगढ में गाँव अमरौली (जवां) एवं गभाना के सी०एस०सी० पर टेली लॉ प्रोजेक्ट को चालू किया गया था, जिन पर प्राधिकरण स्वयं सेवक के रूप में क्रमश: प्रतिभा राघव व पूनम शर्मा नियुक्त हैं| टेली लॉ के माध्यम से विधिक सहायता प्राप्त करने वाले पीड़ित को कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) आना पड़ता है| सेंटर पर नियुक्त पराविधिक स्वयं सेवक पीड़ित के कागज़ात इन्टरनेट के माध्यम से अपलोड कर मामले को राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा नियुक्त अधिवक्ता पैनल के पास पंजीकृत कराता है| पैनल से तिथि और समय प्राप्त कर पीड़ित को अवगत कराया जाता है | प्राप्त तिथि पर वीडियो कांफ्रेंसिंग एवं मोबाइल के माध्यम से पीड़ित और विद्वान अधिवक्ता के मध्य वार्ता कराकर विधिक सहायता प्रदान की जाती है|

अभी तक टेली लॉ के माध्यम से 58 मामलों एवं टेली-लॉ-एप के माध्यम से 09 मामलों का पंजीकरण किया जा चुका है| इस अवसर पर एक नुक्कड़ नाटक का मंचन व पत्रिका का विमोचन भी किया गया|

टेली-लॉ हेतु पात्रता एवं शुल्क- कोई भी महिलाएं, 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चे, एस०सी०/एस०टी०, औधोगिक कामगार/श्रमिक/मजदूर, प्राकृतिक आपदा से पीड़ित कोई व्यक्ति, दिव्यांग, जातीय हिंसा / देह व्यापार से पीड़ित, एक लाख से कम वार्षिक आय वर्ग के लोग और वह व्यक्ति जो हिरासत में हो इस सुविधा हेतु पात्र है| इसका शुल्क मात्र 30/- रुपये है |

सलाह- दहेज़, पारिवारिक विवाद, तलाक, घरेलू हिंसा से वचाव, महिला बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों के भरण पोषण, कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न, यौन दुर्व्यवहार, छेड़-छाड़, जमीन व संपत्ति का अधिकार, महिला पुरुष हेतु समान मजदूरी, मातृत्व लाभ, लिंग जाँच व भ्रूण हत्या, बाल विवाह, बच्चों का यौन शोषण से संरक्षण, शिक्षा का अधिकार, बाल मजदूरी, एफ०आई०आर० लिखवाने और जमानत मिलने की प्रक्रिया, एस०सी०/एस०टी० के प्रति अत्याचार और पुनर्निवास आदि मुद्दों पर सलाह दी जाती है |

लाने होंगें ये दस्तावेज- आधार कार्ड, राशनकार्ड, वोटर कार्ड, जाति प्रमाण पत्र, विकलांगता प्रमाण पत्र, जन्म प्रमाण पत्र |

इस आयोजन में प्रभारी महिला थाना सुनीता मिश्रा, कुसुमलता, सत्यप्रकाश गोयल, प्रतिभा राघव, पूनम शर्मा, उपेन्द्र मिश्रा, राकेश कुमार शर्मा, गीता चौधरी, सावित्री देवी, अतुल तिवारी, नितिन अग्रवाल, सुमैया खान, मीनू चौधरी, आभा वार्ष्णेय, रामकिशोर, नीता, नीलमम उमा शर्मा आदि ने सहभागिता की |