होली पर कविता के जरिये पo जितेन्द्र भारद्वाज ने दी शुभकामनाएँ

शिव सांस्कृतिक समिति के अध्यक्ष पo जितेन्द्र भारद्वाज ने रंगों के पर्व “होली” पर कविता लिखकर सर्वसमाज को समर्पित की है। पंक्तियाँ इस प्रकार हैं…

करें जब पांव खुद नर्तन, समझ लेना कि होली है,
हिलोरें खा रहा हो मन, समझ लेना कि होली है…

तरसती हों जिसके दीदार को आपकी आँखें,
उससे मिलने का आये क्षण, समझ लेना कि होली है…

कभी खोलो हुलस कर अपने घर का दरवाजा,
खड़े देहरी पे हों बंधुबर, समझ लेना कि होली है..

हमारी ज़िन्दगी यूं तो है इक कांटों भरा जंगल,
अगर लगने लगे मधुबन, समझ लेना कि होली है..

अगर महसूस हो तुमको कभी जब सांस लेते हो,
हवाओं में घुला चन्दन, समझ लेना कि होली है…

बुलायें पास जब तुमको धुनें मुहब्बत से भरी
जब गाये ताल पे धड़कन,समझ लेना की होली है..।।

!!….समझ लेना कि होली है….!!

✍