प्रकृति से छेड़छाड़ की बजह से पैदा हो रहे वाइरस : अशोक चौधरी

दुनिया में फैले वाइरस के खतरे को देखते हुए जहाँ देशभर में लोग अपने-अपने तरीके से लोगों को जागरूक कर इस महामारी से लड़ने का संदेश दे रहे हैं।

वहीं अलीगढ़ में आहुति संस्था के अध्यक्ष अशोक चौधरी ने कविता के जरिये मानव सभ्यता के द्वारा प्रकति से की गई छेड़छाड़ और जागरूकता की मुहिम को आगे बढ़ाया है।

आज कोरोना से भयभीत हो,
क्यों! क्या तुमको याद नहीं है;
जब जहर खेत में तुमने बोया था,
लाखों-पक्षियों को हमने खोया था.

सारे के सारे तो जंगल काट डाले,
सारी की सारी पोखरें पाट डाली;
पॉलीथिन को जीवन बना डाला,
जमीन का सारा पानी सुखा डाला.

दानवों से रौंदते रहे उस प्रकृति को,
जिसने दिया स्वास्थ्य और जीवन;
अन्न फल साग सब्जी और यौवन,
और अब जीने के लिए प्रलाप है.

पर कुकर्मों नहीं कोई पश्चाताप है,
बचोगे तभी जब प्रकृति को पूजोगे;
सनातन धर्म को आवरित करोगे,
और शुद्ध संयमित जीवन जिओगे।